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बुधवार, 12 जून 2019

ye mamta ka samander hai


ममता का समंदर है



ये ममता का समन्दर है,
कलाई की जरूरत है ।
इसी से ही तो ये दुनियाँ,
घर आँगन खूबसुरत है ।


बनके जननी इसने रखा,
महीनों कोख में हमको ।-2
करे सम्मान हम इसका,
बताने की जरूरत है ?


ये बेटी है परी जैसी ,
जो पापा की दुलारी है
ये है अर्धांग्नी,जो जीवन सारा,
हम पे वारी है ।
बिना नारी के हस्ती हैतेरी ,
क्या आदमी बतला-2
अदब से पेश आ इससे,
अगर तुझमे शराफत है ।


ये ममता का समन्दर… ,
कलाई की जरूरत… ।


सता ना मान के अबला ,
ये दुर्गा है ये है ज्वाला ।
आह से लोह जलता है,
जला है जो नहीं सम्भला ।
तुझे गर याद है राखी का धागा वो पवित्र सा
तो रखना लाज तू उसकी जिसकी हकदार औरत है ।


ये ममता का समन्दर…


जहाँ नारी की पूजा हो, देवों का वास होता है ,
जहाँ इनपे जुलम होता, वहॉ पर नाश होता है ।
ये है लक्ष्मी,ये है काली,ये है वागेश्वरी माता ,
इन्ही के रहम से सावन, नाम है और शोहरत है ।


ये ममता का समन्दर…


सावन चौहान कारौली...✍एक कलमकार
भिवाड़ी अलवर राजस्थान

मो. 9636931534